Indian Army Shayari Fauji Status in Hindi

जहर पिलाकर मजहब का, इन कश्मीरी परवानों को,
भय और लालच दिखलाकर तुम भेज रहे नादानों को,
खुले प्रशिक्षण, खुले शस्त्र है खुली हुई शैतानी है,
सारी दुनिया जान चुकी ये हरकत पाकिस्तानी है,

Army Shayari

Army Shayari

दूध और खीर की बात करते हों,
हम तुम्हे कुछ भी नही देंगे,
कश्मीर की तरफ नजर भी उठाया,
तो लाहौर भी छीन लेंगे.

Indian Army Shayari

जहाँ हम और तुम हिन्दू-मुसलमान के फर्क में मर रहे हैं,
कुछ लोग हम दोनों के खातिर सरहद की बर्फ में मरे रहे हैं.

नींद उड़ गया यह सोच कर, हमने क्या किया देश के लिए,
आज फिर सरहद पर बहा हैं खून मेरी नींद के लिए.

indian army shayari

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फ़ौजी की मौत पर परिवार को दुःख कम और गर्व ज्यादा होता हैं,
ऐसे सपूतो को जन्म देकर माँ का कोख भी धन्य हो जाता हैं.

army shayari

जिसकी वजह से पूरा हिन्दुस्तान चैन से सोता हैं,
कड़ी ठंड, गर्मी और बरसात में अपना धैर्य न खोता हैं.

कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना,
कभी तपती धूप में जल के देख लेना,
कैसे होती हैं हिफ़ाजत मुल्क की,
कभी सरहद पर चल के देख लेना

fauji status

fauji status

जब हम तुम अपने महबूब की आँखों में खोये थे,
जब हम तुम खोयी मोहब्बत के किस्सों में खोये थे,
सरहद पर कोई अपना वादा निभा रहा था,
वो माँ की मोहब्बत का कर्ज चुका रहा था.

indian army shayari

मिलते नही जो हक वो लिए जाते हैं,
है आजाद हम पर गुलाम किये जाते हैं,
उन सिपाहियों को रात-रत नमन करो,
मौत के साए में जो जिए जाते हैं.

foji shayari

foji shayari

“सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से,
ये घटती-बढ़ती रहती हैं वीरों की शमशीरों से.

shayari for army man

हर पल हम सच्चे भारतीय बनकर देश के प्रति अपना फर्ज निभायेंगे.
जरूरत पड़ी तो लहू का एक-एक कतरा देकर इस धरती का कर्ज चुकायेंगे.

सरहद पर एक फौजी अपना वादा निभा रहा हैं,
वो धरती माँ की मोहब्बत का कर्ज चुका रहा हैं.

अपना घर छोड़ कर, सरहद को अपना ठिकाना बना लिया,
जान हथेली पर रखकर, देश की हिफाजत को अपना धर्म बना लिया.

fauji status in hindi

fauji status in hindi

किसी गजरे की ख़ुशबू को महकता छोड़ के आया हूँ,
मेरी नन्ही से चिड़िया को चहकता छोड़ के आया हूँ,
मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना ऐ भारत माँ,
मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ के आया हूँ.

मेरे जज्बातों से मेरा कलम इस कदर वाकिफ हो जाता हैं,
मैं इश्क भी लिखना चाहूँ तो इन्कलाब लिखा जाता हैं