Political Shayari Rajnitik Shayari Siyasat Shayari

मुझको ताजीम की सीख देने वाले,
मैंने तेरे मुँह में कई जुबान देखा है,
और तू इतना दिखावा भी ना कर अपनी झूठी ईमानदारी का
मैंने कुछ कहने से पहले अपने गिरेबां में देखा है.

सियासत की रंगत में ना डूबो इतना,
कि वीरों की शहादत भी नजर ना आए,
जरा सा याद कर लो अपने वायदे जुबान को,
गर तुम्हे अपनी जुबां का कहा याद आए.

Political Shayari

Political Shayari

मैं अपनी आँख पर चशमाँ चढ़ा कर देखता हूँ
हुनर ज़ितना हैं सारा आजमा कर देखता हूँ
नजर उतना ही आता हैं की ज़ितना वो दिखाता है
मैं छोटा हू मगर हर बार कद अपना बढ़ा कर देखता हूँ

Political Shayari

ये जो हालत हैं ये सब तो सुधर जायेंगे,
पर कई लोग निगाहों से उतर जायेंगे…

न मस्जिद को जानते हैं,
न शिवालो को जानते हैं,
जो भूखे पेट हैं,
वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.

Rajnitik Shayari

Rajnitik Shayari

क्या खोया, क्या पाया जग में,
मिलते और बिछुड़ते मग में,
मुझे किसी से नही शिकायत
यद्यपि छला गया पग-पग में.

सवाल जहर का नहीं था, वो तो मैं पी गया,
तकलीफ लोगों को तब हुई, जब मैं फिर भी जी गया.

जहाँ सच हैं, वहाँ पर हम खड़े हैं,
इसी खातिर आँखों में गड़े हैं.

नजर वाले को हिन्दू और मुसलमान दिखता हैं,
मैं अन्धा हूँ साहब, मुझे तो हर शख्स में इंसान दिखता हैं.

Rajnitik Shayari

हमारी रहनुमाओ में भला इतना गुमां कैसे,
हमारे जागने से, नींद में उनकी खलल कैसे.

इस नदी की धार में ठंडी हवा तो आती हैं,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो हैं.

हल्दीघाटी का युद्ध याद अकबर को जब आ जाता था,
कहते हैं अकबर महलो में सोते-सोते जग जाता था.

हमने दुनिया में मुहब्बत का असर जिंदा किया हैं,
हमनें नफ़रत को गले मिल-मिल के शर्मिंदा किया हैं.

Siyasat Shayari

Siyasat Shayari

दुआ करों मैं कोई रास्ता निकाल सकूँ,
तुम्हे भी देख सकूँ, खुद को भी संभाल सकूँ…

कि जब इन नफ़रतों में ख़ुद तुम्हारा दम लगे घुटने,
तो आ जाना हमारी महफ़िलो में ज़िन्दगी जीने.

Siyasat Shayari

मत सोचना मेरी जान से जुदा हैं तू,
हकीकत में मेरे दिल का ख़ुदा हैं तू.

लड़ें, झगड़ें, भिड़ें, काटें, कटें, शमशीर हो जाएँ,
बटें, बाँटें, चुभे इक दुसरे को, तीर हो जाएँ,
मुसलसल कत्ल-ओ-गारत की नई तस्वीर हो जाएँ,
सियासत चाहती हैं हम और तुम कश्मीर हो जाएँ.

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था,
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था.

ख़्वाब टूटे है मगर हौसले अभी ज़िंदा है
मैं वो शक्स हूँ जिससे मुश्किलें भी शर्मिंदा है

हाँ देख ज़रा क्या तेरे क़दमों के तले है,
ठोकर भी वो खाए है,जो इतरा के चले है.

Election Shayari

Election Shayari

लगता था ज़िन्दगी को बदलने में वक़्त लगेगा. . .
पर क्या पता था बदलता हुआ वक़्त ज़िन्दगी बदल देगा.

खूब करो साहिब, कोशिश हमें मिट्टी में दबाने की,
..शायद आपको नहीं मालूम, कि ‘‘हम बीज हैं”
आदत है हमारी बार-बार उग जाने की..

Rajniti Shayari in Hindi

न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदुस्तान वालो
तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में

मेरा झुकना और तेरा खुदा हो जाना,
अच्छा नही, इतना बड़ा हो जाना.

बारूद के इक ढेर पे बैठी दुनिया को क्या सूझ रही हैं
शोलो से हिफ़ाजत का हुनर पूछ रही हैं

अपनी अदा हैं सबसे निराली
इसलिए राजनीति से दूरी बना ली

दोस्ती हो या दुश्मनी सलामी दूर से अच्छी लगती हैं,
राजनीति में कोई नही सगा, ये बात सच्ची लगती हैं.

ये संगदिलो की दुनिया हैं, संभल कर चलना “ग़ालिब”
यहाँ पलको पर बिठाते हैं नजरो से गिराने के लिए.

Neta Shayari

Neta Shayari

हर कोई यहाँ किसी न किसी पार्टी के विचारो का गुलाम हैं,
इसलिए भारत का ये हाल हैं, किसान बेहाल हैं. नेता माला-माल हैं.

जो धरापुत्र का वध कर दे, वह राजपुरूष नाकारा हैं,
जिस धरती पर किसान का रक्त गिरे उसका शासक हत्यारा हैं.

Rajniti Shayari Hindi

रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया
इस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारो

जो सौदागर डॉलर का हैं वो खेती को क्या आँकेगा,
धरती रोटी ना देगी तो खाने में सोना फँकेगा.

सियासत को लहू पीने की लत है,
वरना मुल्क में सब खैरियत है.

अब कोई और न धोखा देगा,
इतनी उम्मीद तो वापस कर दे.
हम से हर ख़्वाब छीनने वाले,
हमारी नींद तो वापस कर दे..

किसी को चांद चमकता नजर आता है
किसी को उसमें दाग नज़र आता है ..

साहब (नेताओ) के घर आजभी चमक-दमक रहे हैं.
भारत में कुछ नवजात बच्चे भूखे पल रहे हैं.

भारत के हम परिंदे, आसमां हैं हद हमारी,
जानते हैं चाँद-सूरज, जिद हमारी जद हमारी.

“स्वर्ग के सम्राट को जा कर ख़बर कर दे
रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे हैं वो” (दिनकर).

करें तो किस से करें शिकवे , करें किस से गिले?
कहाँ चले थे, कहाँ पहुँचे हैं, कहाँ पे मिले.

चंद चेहरे लगेंगे अपने से, खुद को पर बेकरार मत करना,
आखरिश दिल्लगी लगी दिल पर? हम न कहते थे प्यार मत करना.

रंग ढूँढने निकले लोग जब कबीले के,
तितलियों ने मीलो तक रास्ते दिखाए थे.

हर इक बात को “चुप-चाप” क्यूँ सुना जाए,
कभी तो हौसला कर के “नही” कहा जाए.